त्रिकोणासन योग विधि, लाभ और सावधानियां

त्रिकोणासन क्या है ?

त्रिकोणासन खड़े होकर करने वाला एक महत्वपूर्ण आसन है। ‘त्रिकोण’ का अर्थ  होता है  त्रिभुज और आसन का अर्थ योग है।  इसका मतलब यह हुआ कि इस आसन में शरीर त्रिकोण की आकृति का हो जाता है, इसीलिए इसका नाम त्रिकोणासन रखा गया है। त्रिकोणासन योग कमर दर्द को कम करने के लिए एक अतिउत्तम योगाभ्यास है। यह मोटापा घटाने के साथ साथ मधुमेह को काबू करने में बड़ी भूमिका निभाता है।

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त्रिकोणासन की विधि

त्रिकोणासन को सही तरीके से करने पर इसके लाभ बहुत है। जरूरी है इसको सही तरीके से करना। जानिए इसके सरल विधि।
तरीका
  • पांव एक साथ जोड़कर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को जांघों के बगल में ही रहने दें। आप ताड़ासन में भी खड़े रह सकते हैं।
  • अपने पैरों के बीच में 2 से 3 फुट का फासला रखें और अब अपने बाहों को कंधे तक फैलाएं।
  • धीरे-धीरे सांस खींचते हुए अपनी दाईं बांह को सिर के ऊपर ले जाएं ताकि वह कान को छूने लगे।
  • अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपने शरीर को बाईं ओर झुकाएं।
  • घुटने नहीं मोड़ें और हाथों को कान से नहीं हटने दें।
  • अंतिम मुद्रा में आपकी दाईं बांह जमीन के समांतर और बाईं बांह बाएं पांव के समांतर होनी चाहिए, लेकिन बांह उस पांव पर टिकी नहीं होनी चाहिए।
  • धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े और अपने हिसाब से इस मुद्रा को बनाए रखें।
  • सांस लेते हुए धीरे-धीरे पुरानी स्थिति में आ जाएं।
  • इसी क्रिया को दूसरी ओर से भी दोहराएं।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3-5 चक्र करें।

त्रिकोणासन के लाभ

वैसे त्रिकोणासन के लाभ बहुत सारे हैं। यहां पर कुछ महत्वपूर्ण फायदे के बारे में बताया जा रहा है।
फायदे 
  1. त्रिकोणासन वजन कम करने के लिये: अगर आपको मोटापा या पेट की चर्बी  निजात पाना हो तो त्रिकोणासन का अभ्यास करनी चाहिए। यह आपके पूरे शरीर में उपयुक्त खिंचाव लेकर आता है और अतरिक्त फैट को कम करने में अच्छी खासी भूमिका निभाता है।
  2. त्रिकोणासन पेट की चर्बी के लिए: परिवर्तित त्रिकोणासन  अभ्यास करने से पेट की चर्बी को  बहुत सरलता के साथ कम किया जा सकता है।
  3. त्रिकोणासन साफ त्वचा के लिए: इस आसन का नियमित अभ्यास करने से आप त्वचा संबंधी प्रोब्लेम्स से बच जाते हैं। त्वचा पर बार-बार दाने एवं मुंहासे निकलने की समस्या दूर हो जाती है और चेहरे को चमकदार बनाता है।
  4. त्रिकोणासन हाइट बढ़ाने के लिए: इसके रेगुलर अभ्यास से आपके हाइट बढ़ती है और आप अपना मन चाहा कद पा सकते हैं।
  5. त्रिकोणासन फेफड़े के लिए: इसके अभ्यास से  आप अपने फेफड़े में ज़्यदा से ज़्यदा ऑक्सीजन लेते हैं और लंग्स का सही एक्सरसाइज हो जाता है।
  6. त्रिकोणासन शरीर का ऊर्जावान: यह आसन आप को हल्का बनाता है और साथ ही साथ आपके ऊर्जा के मेन्टेन रखता है।
  7. त्रिकोणासन मधुमेह  के लिए: इस योग का प्रैक्टिस करने से टाइप 1 एंड टाइप 2 डायबिटीज को रोका जा सकता है।
  8. त्रिकोणासन कमर दर्द के लिए: इस आसन से आप कमर दर्द को बहुत हद तक ठीक कर सकते हैं।
  9. त्रिकोणासन हिप्स के लिए: इस आसन से आप अपने हिप्स को स्ट्रांग बना सकते हैं तथा इसमें होने वाली परेशानियों से बच सकते हैं।
  10. त्रिकोणासन साइटिका के लिए: इस आसन को अगर धीरे धीरे किया जाए या   विशेषज्ञ के साथ किया जाए तो साइटिका को भी ठीक कर सकते हैं।
  11. त्रिकोणासन जाँघ के फैट के लिए: इस आसन के अभ्यास से आप अपने के चर्बी को गला सकते हैं और साथ ही  साथ इसको सुडौल एवं खूबसूरत बनाता है।
  12. त्रिकोणासन कब्ज के लिए: कब्ज से परेशान रहने वाले आदमी को इस योग का अभ्यास करनी चाहिए।  इससे आपकी पाचन तंत्र मजबूत बनता है और पाचन
  13. स्टैमिना को बढ़ाने के लिए: इस योगाभ्यास से आप अपने स्टैमिना को बढ़ा सकते हैं।
  14. एसिडिटी को  कम करना: यह आसन आपके पेट के ग्रथियों के सही स्राव में मदद करता है और भोजन को पचाने में अहम भूमिका निभाता है।
  15. चिंता व तनाव को कम करना: इसके नियमित अभ्यास से आपके शरीर के ग्लैंड्स उचित मात्रा में हॉर्मोन का स्राव करता है जो धीरे धीरे आपको तनाव ग्रस्त जिंदगी से दूर  जाता है।
  16. यह आपके शरीर को लचीला बनाता है और मांसपेशियों को कठोर होने से रोकता है।
  17. यह शरीर में संतुलन बनाने के लिए एक अच्छा एक्सरसाइज है।
  18. आपके आपके पूरे पैर को सुडौल एवं मजबूत बनाता है।
  19. यह छाती के आकार को बढ़ाने में मदद करता है।
  20. यह नसों को स्वस्थ रखते हुए मानसिक संतुलन बनाये रखने में मदद करता है।
  21. यह आपके कमर की चर्बी को कम करते हुए इसको पतली करने में सहायक है।

त्रिकोणासन के सावधानियां

  • बहुत अधिक कमर दर्द होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • स्लिप डिस्क वाले को इस आसन के अभ्यास से बचना चाहिए।
  • High और low BP में इसको करने से बचना चाहिए।
  • अगर सिर में  चक्कर आ रहा हो तो इसका अभ्यास नहीं करनी चाहिए।
  • गर्दन और पीठ में अधिक दर्द होने पर इसके प्रैक्टिस से बचना चाहिए।
  • माइग्रेन में इसको नहीं करनी चाहिए।
  • हाइपर एसिडिटी में इसको करने से बचे।

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