ताड़ासन योग: विधि, लाभ और सावधानियाँ

ताड़ासन योग क्या है ?

ताड़ासन योग की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। यह पूरी शरीर को लचीला बनाता है और साथ ही साथ कड़ा एवं सख्त होने से रोकता है। यह एक ऐसी योगासन है जो मांसपेशियों को ही नही बल्कि सूछ्म मांसपेशियों को भी बहुत हद तक लचीलापन बनाता है। और इस तरह से शरीर को हल्का तथा विश्राम एवं जोड़ों को ढीला करने में बहुत  बड़ी भूमिका निभाता है। यह योगाभ्यास आपको चुस्त दुरुस्त ही नहीं करता बल्कि आपके शरीर को सुडौल एवं खूबसूरती प्रदान करता है। शरीर में जहाँ तहाँ जो अतरिक्त चर्बी जमी हुई है उसको पिघलता है और आपके पर्सनालिटी में नई निखार ले कर आता है। लाभ के साथ साथ इसके कुछ सावधानियां भी हैं।  ताड़ासन के लाभ एवं विधि

ताड़ासन योग के विभिन्य नाम

ताड़ासन को विभिन्य नामों से जाना जाता है जैसे:

  • पर्वतआसन: इसे पर्वत योग मुद्रा इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि पर्वत की तरह यह स्थिर एवं शांत प्रतीत होता है।
  • पाम ट्री योग: इसे पाम ट्री के नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि खजूर के पेड़ की तरह लम्बा जान पड़ता है।
  • स्वर्गीय योग: इसे स्वर्गीय मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसमें साधक अपने आप को स्वर्ग की ओर खींचता हुआ प्रतीत होता है।

ताड़ासन कैसे करें ?

ताड़ासन को अभ्यास करना बहुत आसान है। इसके ज़्यदा से ज़्यदा फायदा पाने के लिए इसे आपको सही विधि से करना होगा।

  • इसके लिए सबसे पहले आप खड़े हो जाए और अपने कमर एवं गर्दन को सीधा रखें।
  • अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें  और सांस लेते हुए धीरे धीरे पुरे शरीर को खींचें।
  • खिंचाव को पैर की अंगुली से लेकर हाथ की अंगुलियों तक महसूस करें।
  • इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाये रखें ओर सांस ले सांस  छोड़े।
  • फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ एवं शरीर को पहली अवस्था में लेकर आयें।
  • इस तरह से एक चक्र पूरा हुआ।
  • कम से कम इसे तीन से चार बार प्रैक्टिस करें।

 ताड़ासन योग के फायदे

ताड़ासन मुद्रा के जितने भी फायदे गिनाए जाए कम है। यहाँ इसके कुछ महत्वपूर्ण लाभ के बारे में जिक्र किया जा रहा है।

  1. ताड़ासन वजन कम करने के लिए: अगर इस आसन को सही तरह से अभ्यास किया जाए तो बहुत हद तक पेट की चर्बी को कम करने में मदद मिल सकती है। पेट की चर्बी ही नहीं यह पुरे शरीर के अतरिक्त वसा को कम करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। इस आसन को सही तरीके से करने से पुरे बॉडी में खिंचाव  आता है और आपके शरीर को एक सुडौल दिशा में ले जाता है।
  2. ताड़ासन हाइट बढ़ाने के लिए: यह आसन बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए अतिउत्तम योगाभ्यास है। उचाई बढ़ाने के लिए 6 से 20 साल के बच्चों को यह आसन करवाया जाता है। अगर आप इसको किसी योग विशेषज्ञ के सामने करते है तो परिणाम की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है।
  3. ताड़ासन पीठ की दर्द के लिए: यह आसन पीठ की दर्द के लिए बहुत लाभकारी है। अगर इसका सही तरह से अभ्यास किया जाए तो पीठ की दर्द से हमेशा हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है। इसमें आप ऊपर की ओर अपने आप को खिंचते है और जहाँ पर दर्द है वहां खिंचाव को महसूस करने की कोशिश करते हैं।
  4. ताड़ासन नसों एवं मांसपेशियों की दर्द के लिए : अगर आप नसों की दर्द से परेशान हैं तो आपको पर्वतासन करनी चाहिए। यह नसों की दर्द को ही कम नहीं करता बल्कि मांसपेशियों के साथ नसों को मजबूत और सबल बनाता है। मांसपेशियों की ऐंठन और मरोड़ जैसी समस्याओं को भी दूर करने मेीं मदद करता है।
  5. घुटने की दर्द से राहत: अगर आप घुटने की दर्द से परेशान हैं तो आपको इस आसन का अभ्यास करनी चाहिए। लेकिन ध्यान रहे इसमें आपको अपने तलवे को जमीन पर ही रखनी है और पैर की अंगुलियों पर आकर इस आसन को नहीं करनी है।
  6. चलने की कला सिखाता है: बहुत सारें लोगों को पता नहीं है की चलना कैसे चाहिए। खास कर इस पर विशेष ध्यान डॉ. बी के अयंगर के योगभ्यास में मिलता है। इस आसान की प्रैक्टिस करने से आपको चलने की आर्ट आती है और साथ ही साथ आप बहुत सारी परेशानियों से दूर हो जाते हैं।
  7. ताड़ासन एकाग्रता  और संतुलन के लिए:  इस योग को ठीक तरह से करने से आपकी एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है। नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से शरीर में संतुलन का अच्छा खासा प्रभाव देखा जा सकता है।
  8. ताड़ासन पैरों को मजबूती देता है : ताड़ासन योग पैरों की समस्यां जैसे  सूजन, दर्द, सुन्न, जलन और झनझनाहट के लिए काफी लाभदायक है  है।
  9. ताड़ासन सायटिका के लिए:  इस आसन को  नियमित रूप से किया जाए तो सायटिका का दर्द बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
  10. ताड़ासन दर्द और पीड़ा के लिए: इसके अभ्यास करने से पुरे शरीर का दर्द व पीड़ा को कम किया जा सकता है।

 ताड़ासन की सावधानियाँ

  •  ताड़ासन वैसे साधक को नहीं करनी चाहिए जिनके घुटने में बहुत ज्यादा दर्द हो।
  • यह आसन गर्ववती महिला के लिए वर्जित है।
  • इसका अभ्यास उस वक्त नहीं करनी चाहिए जब आपको सिर दर्द हो।
  • अगर आप इस आसन को करना सीख रहें हैं तो पैरों की अंगुलियों पर आकर इस  योगाभ्यास को मत करें।
  • अगर रक्तचाप ज्यादा या कम हो तब भी इस आसन को करने से बचना चाहिए।

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2 Comments

  1. Avatar for Admin Anjali yadav December 14, 2016
  2. Avatar for Admin Kristanna May 18, 2017

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