उज्जयी प्राणायाम विधि, लाभ और सावधानियां

उज्जयी प्राणायाम क्या है – Ujjayi Pranayama in Hindi

उज्जयी प्राणायाम एक ऐसी प्राणायाम है जिसका नियमित रूप से अभ्यास करने से आपकी एजिंग प्रोसेस धीमी हो जाती है और आप बहुत लंबे समय तक जवां लगते हैं। यह तो एक फायदे है, इस प्राणायाम के अनगिनत स्वास्थ्य लाभ है। अब हम जानेंगें कि इस प्राणायाम के परिभाषा के बारे में। इसमें दोनों नासिकाओं से धीरे धीरे सांस लिया जाता है और जब सांस छोड़ा जाता है तो दाएं नासिका को बंद कर बायीं नासिका से सांस को धीरे धीरे निकाला जाता है। जब दोनों नासिका से सांस लिया जाता है तो गर्दन के थाइरोइड वाले हिस्से को कंपन कराके ऊं की ध्वनि उत्पन्न की जाती है। यह ध्वनि उज्जयी प्राणायाम की विशिष्टता है।Ujjai Pranayama steps, benefits

हठप्रदीपिका में उज्जयी प्राणायाम

हठप्रदीपिका के अनुसार मुंह बंद कर व्यक्ति को धीरे-धीरे दोनों नासिकाओं से वायु अंदर खींचना चाहिए। सांस खींचते समय इस प्रकार ध्वनि उत्पन्न करनी चाहिए कि श्वास गले से सीने तक महसूस हो। कुंभक करने के बाद वायु को बायीं नासिका से धीरे धीरे छोड़ी जाती है। यह बलगम के कारण होने वाली गले की बीमारियों को दूर करता है और जठराग्नि को बढ़ाता है।हठप्रदीपिका (2/51-52)

उज्जयी प्राणायाम विधि –  Ujjayi Pranayama steps in Hindi

उज्जयी प्राणायाम कैसे किया जाए , यहां पर इसको बहुत सरल तरीके से बताया गया है। नीचे दिए गए विधि का अनुसरण करके आप इस प्राणायाम को आसानी से अपने आप कर सकते हैं।

  • सबसे पहले आप पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाए।
  • मुंह बंद रखें।
  • अब आप दोनों नासिकाओँ से धीरे-धीरे एक लय के साथ तबतक श्वास लें जबतक श्वास पूरी तरह फेपड़े में ना भर जाए।
  • जब दोनों नासिका से सांस लें तो गर्दन के थाइरोइड वाले हिस्से को कंपन कराके ऊं की ध्वनि उत्पन्न करने की कोशिश करें। ये ध्वनि हल्की और समान होनी चाहिए।
  • श्वास लेते समय सीने को फुलाने की कोशिश करें।
  • श्वास को तबतक अंदर रखें जबतक आप इसको रोक सकतें हैं।
  • फिर दाहिने अंगूठे से दाहिनी नासिका बंदकर बायीं नासिका से धीरे-धीरे श्वास छोड़ें।
  • बायीं नासिका से श्वास छोड़ने की बजाय आप दोनों नासिकाओं से भी धीरे-धीरे श्वास छोड़ सकते हैं।
  • यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप 10 चक्र करें।

उज्जयी प्राणायाम के लाभ –  Ujjayi Pranayama benefits in Hindi 

  1. यह आपकी उम्र को स्वस्थ रूप में बढ़ाने में मदद करती है। शास्त्रों में लिखा गया है के जो मनुष्य नियमित रूप से इस प्राणायाम का अभ्यास करता है उसको मौत भी जल्दी नहीं आती। इससे इस प्राणायाम का आप महत्त्व जान सकते हैं।
  2. उज्जयी प्राणायाम बहुत लंबे समय तक आपको जवां रखता है और साथ ही साथ आपकी एजिंग प्रोसेस को भी धीमी कराता है।
  3. यह थाइरोइड रोगियों के लिए बहुत उपयुक्त प्राणायाम है।
  4. गर्दन में मौजूद पैराथाइरॉइड को भी स्वस्थ रखता है।
  5. उज्जयी प्राणायाम मस्तिष्क से गर्मी दूर कर इसे ठंड पहुंचाता है।
  6. इसका नियमित अभ्यास से आपकी पाचान सकती बढ़ती है। (हठप्रदीपिका 2/52)
  7. यह नाड़ी से सम्बंधित विकार को दूर करता है और ऊर्जा के प्रवाह में मदद करता है। (हठप्रदीपिका 2/53)
  8. यह गले से बलगम को हटाता है और फेफड़े के हर तरह की बीमारियों को रोकता है। (हठप्रदीपिका 2/53)
  9. यह हृदय रोगियों के लिए बहुत अच्छा प्राणायाम है।
  10. इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास साधक को बलगम, अपच, पेचिश, लीवर की परेशानी, खांसी या बुखार जैसी बीमारियों से बचाता है।

उज्जयी प्राणायाम की सावधानियां –  Ujjayi Pranayama precautions in Hindi

  • उज्जयी प्राणायाम उन्हें नहीं करनी चाहिए जिनका थाइरोइड बहुत अधिक बढ़ा हुआ हो। ऐसे व्यक्ति को किसी विशेषज्ञ के निगरानी में इस प्राणायाम की प्रैक्टिस करनी चाहिए।
  • निम्न रक्तचाप वाले व्यक्तियों को यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप और हृदय रोगियों को कुंभक नहीं करना चाहिए, वो बिना कुंभक के इसे कर सकते हैं।

Recommended Articles:

Share on:

Leave a Comment