शीतली प्राणायाम विधि, लाभ और सावधानी

शीतली प्राणायाम क्या है। Sheetli pranayama in Hindi

शीतली का अर्थ है शीतल। इसका अर्थ शांत, विरक्त और भावहीन भी होता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह प्राणायाम पूरे शरीर को शीतल करता है। शीतकारी प्राणायाम की तरह ही यह प्राणायाम भी विशेष तौर पर शरीर का ताप कम करने के लिए बनाया गया है। इस प्राणायाम का अभ्यास न सिर्फ भौतिक शरीर को शीतल करता है बल्कि मस्तिष्क को भी शांत करता है। इस प्राणायाम का अभ्यास गर्मी में ज़्यदा से ज़्यदा करनी चाहिए और शर्दी के मौसम में नहीं के बराबर करनी चाहिए।Sitali pranayama in Hindi

शीतली प्राणायाम की व्याख्या हठप्रदीपिका और घेरंडसंहिता में इस प्रकार की गई हैः

हठप्रदीपिका व्याख्या

जिह्वया वायुमाकृष्य पूर्ववत्कुम्भसाधनम्।
शनकैर्घ्राणरन्ध्राभ्यां रेचयेत्पवनं सुधीः।। – ह. प्र. 2/57

घेरंडसंहिता व्याख्या
जिह्वा वायुमाकृष्य उदरे पूरयेच्छनैः।
क्षणं च कुम्भकं कृत्वा नासाभ्यां रेचयेत् पुनः।। – घें. सें. 5/73

 

शीतली प्राणायाम विधि। Sheetli pranayama steps

  • सबसे पहले आप पद्मासन या किसी भी आरामदायक आसन में बैठें।
  • आंखों को बंद करें।
  • अब अपने हाथों को ज्ञानमुद्रा या अंजलिमुद्रा में घुटनों पर रखें।
  • दोनों किनारों से जिह्वा को मोड़कर नली का आकार बना लें।
  • नली के आकार की जिह्वा से श्वास अंदर खींचकर फेफड़ों को अपनी पूरी क्षमता के साथ भर लें और मुंह बंद कर लें।
  • जालंधरबंध को रोककर रखें।
  • जालंधरबंध के साथ जबतक श्वास को अंदर रोक सकते हैं, रोककर रखें।
  • जालंधरबंध को छोड़ दें और धीरे-धीरे नासिका से श्वास छोड़ें।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप शुरुवाती दौड़ में 10 से 15 बार करें और फिर धीरे धीरे इसे प्रतिदिन 15 से 30 मिनट तक करें।

शीतली प्राणायाम लाभ। Sheetli pranayama benefits

वैसे तो शीतली प्राणायाम बहुत सारे फायदे हैं लेकिन यहां पर इसके कुछ महत्वपूर्ण लाभ के बारे में बताया जा रहा है।

  1. तनाव कम करने में: इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से आप तनाव को बहुत हद तक कम कर सकते हैं।
  2. चिंता को दूर भागने में: यह प्राणायाम चिंता को कम करने में बहुत अहम रोल निभाता है।
  3. डिप्रेशन के लिए रामबाण है: अगर आप डिप्रेशन से ग्रसित हैं तो इस प्राणायाम का अभ्यास जरूर करनी चाहिए। यह डिप्रेशन को कम करने में रामबाण का काम करता है।
  4. क्रोध: यह प्राणायाम गले और क्रोध की बीमारियों के लिए लाभकारी होता है। यह आपके गुस्सा को भी कम करता है।
  5. भूख और प्यास: भूख और प्यास को नियंत्रित करने में मददगार होता है।
  6. रक्तचाप कम करता है : इस प्राणायाम से ठंडकपन का अहसास होता है। यह शरीर में शीतलता लाती है और रक्तचाप कम करता है।
  7. पित्त दोष: पित्त दोष (गर्मी) के असंतुलन से होने वाली बीमारियों में फायदेमंद होता है।
  8. हार्मोन्स के स्राव: जननांगों में हार्मोन्स के स्राव को नियंत्रित करता है।
  9. वासना : वासना की मानसिक और भावनात्मक प्रभाव को कम करता है।
  10. शांत करने में: चूंकि यह प्राणायाम आपके शरीर को शीतलता प्रदान करती है जिसके कारण यह आपको शांत करने में अहम् भूमिका निभाता है।
  11. स्वास्थ्य के लिए: यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसका नियमित अभ्यास से आप बहुत सारे परेशानियों से बच सकते हैं।
  12. रक्त की शुद्धता: यह प्राणायाम रक्त को शुद्ध करता है।
  13. अपच से राहत: यह अपच से राहत देता है और बलगम एवं पित्त से होने वाले विकारों में फायदा पहुंचाता है।
  14. आंखों और त्वचा के लिए: यह आंखों और त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है।
  15. जहर का प्रभाव : जो यह प्राणायाम नियमित करते हैं, उनपर जहर का प्रभाव नहीं होगा।
  16. त्वचा को बदलने की क्षमता: यह प्राणायाम एक नागिन के श्वसन की तरह होता है। माना जाता है कि साधक इस प्राणायाम के अभ्यास से अपनी त्वचा को बदलने की क्षमता रखता है। यह प्राणायाम वायु, जल और भोजन के अभाव में धैर्य क्षमता को भी बढ़ाता है।

 

शीतली प्राणायाम सावधानिया। Sheetli pranayama precautions

  • सर्दी में इस प्राणायाम को न करें।
  • खांसी या टॉन्सिल से पीड़ित व्यक्तियों को यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • कब्ज के पुराने मरीजों को भी ये प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • सर्दियों में इस प्राणायाम से बचें
  • जिनका रक्तचाप कम रहता हो उन्हें इस प्राणायाम को नहीं करनी चाहिए।

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