मधुमेह (डायबिटीज) रोकने के लिए योग रामबाण है

यहां पर कुछ योगासन बारे में बताया जा रहा है जो डायबिटीज को रोकने एवं इसके प्रबंधन में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। कहा जाता है कि योग ही एक ऐसी उपचार विधि है जो मधुमेह को जड़ से उखाड़ फेंक सकता है। यहां पर हम आपको कुछ योगाभ्यास के विधि के बारे में जिक्र कर रहें है जिसको कर के आप डायबिटीज को रोक ही नहीं हैं सकतें बल्कि हमेशा हमेशा लिए इस से छुटकारा प सकते हैं।vakrasana for diabetes

 

शीर्षासन डायबिटीज के लिए रामबाण

शीर्ष का अर्थ सिर होता है। इस आसन में व्यक्ति को सिर पर खड़ा होना पड़ता है इसीलिए इसे शीर्षासन कहते हैं। इससे सिर में रक्त का प्रवाह बढ़ता है जिससे स्मृति बढ़ती है। यह आसन अंतःस्रावी गंथियों को स्वस्थ बनाए रखता है। यह पीयूष (पिटुइटरी) ग्रंथि एवं शीर्ष ग्रंथि का कामकाज बेहतर करते हुए डायबिटीज प्रबंधन के लिए एक बेहतरीन योग है। लेकिन इसके अधिक से अधिक फायदा उठाने के लिए इसके विधि को जानना बहुत ही जरूरी है।

  • कपड़ा मोड़कर जमीन पर रखें और उसके पास घुटनों के बल झुक जाएं।
  • अंगुलियों को आपस में कसकर जकड़ लें, हथेलियों से प्याली बनाएं तथा उन्हें चित्र में दिखाए अनुसार मुड़े कपड़े पर रख लें।
  • सिर को कपड़े पर इस प्रकार रखें, जिससे सिर का ऊपरी भाग हथेलियों से स्पर्श करता रहे।
  • पंजों को सिर की ओर खींचते हुए घुटनों को जमीन से उठा लें। धीरे-धीरे झूलते हुए घुटने मोड़कर पांवों को जमीन से हटा लें।
  • जब इस स्थिति में शरीर का उचित संतुलन बन जाए तो धीरे-धीरे पांव सीधे कर लें। संतुलन प्राप्त किए बगैर पांवों को सीधा करने के औचक प्रयास से गिरने का डर होता है।
  • शुरू में संतुलन बनाने में कुछ समय लग सकता है।
  • अपनी क्षमता के अनुसार इस मुद्रा में रहें। घुटनों को फैलाते हुए वापस आएं तथा उन्हें विपरीत क्रम में जमीन पर ले आएं।

 

वक्रासन योग से मधुमेह का नियंत्रण

‘वक्’ का अर्थ होता है टेढ़ा। इस आसन में रीढ़ टेढ़ी या मुड़ी हुई होती है, इसीलिए इसका यह नाम है। यह आसन मधुमेह के लिए बहुत ही मुफीद है। यह अग्न्याशय को सक्रिय करता है तथा मधुमेह में उपयोगी होता है। जानिए वक्रासन की सरल विधि!

  • पांवों को फैलाकर जमीन पर बैठें।
  • बाएं पांव को घुटने से मोड़ें तथा पैर का दाएं घुटने के बगल में रखें।
  • रीढ़ सीधी रखें तथा सांस छोड़ते हुए कमर को बाईं ओर मोड़ें।
  • दाईं बांह को बाएं पैर की ओर इस प्रकार लाएं कि दाईं बांह का बाहरी हिस्सा बाएं पांव के बाहरी हिस्से को स्पर्श करे और दायां हाथ बाएं पैर के नजदीक रखें।
  • बाईं बांह पीछे ले जाएं और हथेली को जमीन पर इस प्रकार रखें कि धड़ टेढ़ा होकर भी सीधा तना रहे।
  • यही क्रिया दूसरी ओर से दोहराएं।

 

अर्द्धमत्स्येंद्रासन योग डायबिटीज उपचार में

अर्द्धमत्स्येंद्रासन का नाम महान योगी मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। यह आसान डायबिटीज के लिए रामबाण का काम करता है। इस आसन में यकृत और प्लीहा की मालिश होती है और इंसुलिन की सही मात्रा स्राव में मदद करता है। इसी कारण मधुमेह में भी यह उपयोगी है। अब जाने इसको सही तरीके से कैसे क्या जाये।

  • जमीन पर बैठें। बायां पांव इस प्रकार मोड़ें कि एड़ी कूल्हे के किनारे से स्पर्श कर रही हो।
  • दायां पैर जमीन पर बाएं घुटने के निकट रखें।
  • बाईं बांह को दाएं घुटने के ऊपर रखें तथा दाएं पैर के पंजे को बाएं हाथ से पकड़ लें।
  • दाईं बांह को कमर की ओर से ले जाकर पीठ के पीछे ले जाएं और पीछे से नाभि स्पर्श करने का प्रयास करें।
  • अपना सिर दाईं ओर घुमाएं और पीछे की ओर देखने का प्रयास करें।
  • इसी क्रिया को विपरीत दिशा में दोहराएं।

 

मत्स्यासन योग से डायबिटीज का प्रबंधन

संस्कृत शब्द मत्स्य का अर्थ मछली होता है। इस आसन की अंतिम मुद्रा में शरीर मछली की आकृति जैसा लगता है इसीलिए इस आसन को मत्स्यासन कहते हैं। गर्भाशय की समस्याओं एवं मधुमेह से पीड़ित महिलाओं के लिए यह उत्तम है। इसको करने के सरल विधि

  • पद्मासन में बैठ जाएं।
  • धीरे-धीरे पीछे झुकें और पूरी तरह पीठ पर लेट जाएं। पीठ के अगले हिस्से को कोहनियों तथा हथेलियों की सहायता से उठाएं तथा सिर जमीन पर रख लें।
  • बाएं पांव को दाएं हाथ से पकड़ लें तथा उसके बाद दाएं पांव को बाएं हाथ से पकड़ें। कोहनियों को जमीन पर टिका रहने दें।
  • घुटने जमीन से स्पर्श होने चाहिए तथा पीठ को इस तरह मुड़ा होना चाहिए कि शरीर को सिर तथा घुटनों का ही सहारा मिले। अंतिम मुद्रा में बने रहें।
  • मूल अवस्था में लौटने के लिए पंजे छोड़ दें। हथेलियां जमीन पर रखें। हाथों की सहायता से सिर को सीधा करें एवं धीरे-धीरे उठ जाएं।
  • शवासन में विश्राम करें।

 

मयूरासन योग से डायबिटीज रोकथाम

मयूर का अर्थ मोर होता है। इस आसन में शरीर की आकृति मोर के समान होती है। यह मधुमेह के उपचार के लिए अत्यन्त लाभदायक योग है

  • वज्रासन में बैठें। घुटनों को फैलाएं तथा उन्हें जमीन पर रखते हुए घुटनों के बल बैठ जाएं।
  • आगे की ओर झुकें, अपने हाथों की अंगुलियां फैलाएं तथा अंगुलियों को पैरों की दिशा में रखते हुए हथेलियों को जमीन पर टिका लें।
  • बाहों के अगले हिस्से को एक साथ रखते हुए कोहनियां मोड़ें। कोहनियों को पेडू वाले क्षेत्र के दोनों ओर रख लें तथा छाती को बांहों के ऊपरी हिस्से के पिछले भाग पर टिकाएं।
  • दोनों पांव फैलाएं। पांवों को एक साथ रखते हुए बहुत सावधानीपूर्वक धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ें।
  • शरीर के भार को हाथों तथा कलाइयों का सहारा देते हुए पांवों को जमीन से उठा लें।
  • सिर तथा धड़ को आगे की ओर धकेलें।
  • जब तक संभव हो, इसी अवस्था में रहें। अंतिम मुद्रा में शरीर जमीन के समांतर रहता है, पांव फैले रहते हैं तथा पैर एक साथ रहते हैं।
  • सिर नीचे करते हुए वापस आएं घुटनों को जमीन पर रखें एवं पांव को नीचे ले आएं।

 

कपालभाति योग से मधुमेह का इलाज

कपालभाति पुरे शरीर का संतुलन बनाता है, अंतःस्रावी गंथियों को स्वस्थ बनाए रखता है और पीयूष (पिटुइटरी) ग्रंथि को हॉर्मोन स्राव में मदद करता है। यह संचरण को बेहतर बनाकर, वैकल्पिक संकुचन के सहायता से निचली मांसपेशियों को आराम देकर अग्नाशय को संतुलित करता है। इसको करने के सरल विधि जाने।

  • आराम से कमल ले आकर में बैठने के उपरांत कुछ गहरी सांस लें।
  • फिर ताकत से सांस को निकाले , बस ध्यान रहे इसमें साँस लेना निष्क्रिय है।
  • शुरू में तीन चक्र करें, हर चक्र में 10 बार साँस निकालें और फिर धीरे धीरे चक्रों की संख्या 5 या 6 कर दें।
  • कुछ देर के लिए आराम करें।
  • कुछ सप्ताह के बाद आप अपने चक्रों की संख्या 30 से 40 कर सकते हैं।

Recommended Articles:

Leave a Reply