सर्पासन (स्नेक पोज़ ) विधि, लाभ और सावधानी

सर्पासन क्या है -Sarpasana  meaning in Hindi

सर्पासन पेट के बल लेट कर किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण  योगाभ्यास है।  यह दिल के स्वास्थ्य के लिए एक अद्भुत आसन माना जाता है। यही नहीं यह योगाभ्यास फेपड़े और पीठ को भी स्वस्थ में भी अहम भूमिका निभाता है। आज  हम यहां सर्पासन के आसान विधि, लाभ और सावधानी के बारे में बताएंगे। सर्पासन के विधि को ठीक से समझ कर आप इस आसन की अधिक से अधिक फायदा उठा सकते हैं।

सर्पासन (स्नेक पोज़ ) विधि, लाभ और सावधानी
Sarpasana

सर्पासन विधि- Sarpasana steps in Hindi

  • योग मैट के ऊपर पेट के बल लेट जाएं।
  • अपनी पीठ के पीछे अपनी दोनों बाहों को खिंच कर पैर के समांतर रखें।
  • माथे को जमीन पर टिकाएं।
  • पैर सीधे और साथ में होने चाहिए।
  • दोनों हाथों की अँगुलियों को इनटरलॉक करें।
  • थोड़े समय के लिए सामान्य रूप से सांस लें।
  • अब सांस लेते हुए सिर और कन्धों को उठाएं और इसका प्रभाव छाती और पेट पर महसूस करें।
  • साथ  ही साथ दोनों हाथों को भी पीठ के ऊपर उठाएं
  • शरीर को जितना हो सके उतना ऊपर उठाएं वह भी बगैर किसी तनाव के।
  • सांस को रोकते हुए इस पोज़ को मेन्टेन करें।
  • फिर सांस  छोड़ते हुए अपने पहली  अवस्था में आ जाएं।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से इसको पांच बार करें।

 

सर्पासन में श्वास और अवधि- Sarpasana breathing in Hindi

प्रारंभिक स्थिति में साँस जितना गहरा हो सके लें। शरीर को ऊपर उठाने और योगाभ्यास को मेन्टेन रखने के दौरान सांस को रोकें।  जब अपने शरीर को नीचे लाना हो तो सांस छोड़ते हुए अपने पहली अवस्था में आएं।  ध्यान रहे सांस लेने के प्रति आप जागरूक रहें

 

सर्पासन की सावधानी-Sarpasana precautions in Hindi

  • सर्पासन निम्न अवस्था में नहीं करनी चाहिए।
  • पेट के अल्सर अवस्था में।
  • उच्च रक्तचाप
  • हृदय की परेशानी
  • हर्निया

 

सर्पासन के वैरिएशंस-Sarpasana variations in Hindi

अगर आप पहले बताये गए तकनीक को आसानी से कर लेते हैं और आपकी पीठ की मांसपेशियां आप को सपोर्ट करती है तो इस आसन  में कुछ बदलाव करके आप इसका अभ्यास कर सकते हैं।

  • अपने बाहों को प्रत्येक तरफ फैलाएं मानों की शरीर में पंख लगे हों।
  • अंगूठों को इंटरलॉक करें और ऊपर उठाएं ताकि आपके सिर , पैर, धड़ और हाथ सब एक सीध में हो।

 

सर्पासन के लाभ-Sarpasana benefits in Hindi

  • यह आसन रीढ़ को मजबूत बनाने में मदद करता है।
  • इससे मांसपेशियों  को अच्छी मालिश मिलता है।
  • पेट और पैल्विक अंग के लिए अत्यधिक लाभदायक है।
  • यह आसन फेफड़ों के लिए बहुत लाभकारी है तथा कार्बन डाइऑक्साइड एवं ऑक्सीजन का आदान-प्रदान में मदद पहुंचाता है।
  • यह फेफड़े  को लोचदार बनाने के साथ फेफड़े को स्वास्थ्य और दक्षता भी बनाता है।
  • यह अभ्यास ह्रदय एवं गुर्दे के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • यह पीठ दर्द के इलाज के लिए अहम रोल अदा करता है।
  • यह  योगाभ्यास अधिक से अधिक फेफड़ों के खिंचाव को सुनिश्चित करता है जिससे फेफड़ों के आंतरिक क्षेत्र के विस्तार में मदद मिलती है जिससे अस्थमा में फायदा पहुंचता है।
  • यह अग्न्याशय, यकृत और पित्ताशय की भी मालिश करता है।
  • आसन तनाव और चिंता पर काबू पाने में प्रभावी है।
  • अगर इसको सही तरह से किया जाए तो स्लिप्ड डिस्क रोगी भी इस योग मुद्रा  से लाभान्वित होगा।

Recommended Articles:

Leave a Comment