वेद में योग का इतिहास। History of Yoga in Hindi

उपनिषदों में योग।Upanishad Yoga in Hindi

  • अगर हम उपनिषदों की बात करें तो योग ने इसमें  प्रमुख भूमिका निभाई। इस दौरान दो योग विद्याओं को विशेष रूप से प्रसिद्धि मिली।  इसमें एक को कर्म योग और दूसरे को ज्ञान योग के नाम से जाना जाता है।  मैत्रायण्य उपनिषद ने योग को सांस और मन को साध्य ओम का उपयोग करने के रूप में परिभाषित किया।
  • मैत्रायण्य ने योग को छह रूप में प्रस्तुत किया-प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, एकाग्रता, चिंतन और समाधी। 

 

भगवद गीता में योग। Bhagavad GitaYoga in Hindi

  • भगवद गीता एक ऐसी योग ग्रंथ है जिसमें योग का सबसे व्यापक वर्णन बहुत सुन्दर ढंग से किया गया है।
  • गीता में योग को तीन भाग में बाँटा गया है: कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग। 
  • भगवद गीता में ज्ञान योग ध्यान को इंगित करता है और जबकि कर्म योग सेवा-धर्म को बताता है। 
  • गीता में बाद के अधिकांश अध्यायों में भक्ति योग के बारे में बताता है। 

 

पूर्व शास्त्रीय योग

सार्वभौमिक चेतना की अवधारणा उपनिषदों की आध्यात्मिक शिक्षाओं से विकसित हुई। जहाँ पर योग के बहुत सारे नाम से जाना जाता है जैसे आत्मान, पारलौकिक स्व, दैवीय, ईश्वर, पुरुष, शुद्ध जागरूकता, द्रष्टा, साक्षी और ज्ञाता।  पूर्व शास्त्रीय काल के मध्य में, सांख्य नामक एक स्कूल का जन्म हुआ जिसमें कपिला नामक एक ऋषि ने आधुनिक योगिक विश्व दृष्टिकोण के लिए आधार विकसित किया।

 

पतंजलि योग सूत्र। Patanjali Sutra Yoga in Hindi

  • पतंजलि अपने प्रसिद्ध ग्रंथ योग सूत्र के लिए जाना जाता है जहाँ पर योग की पहली व्यवस्थित प्रस्तुति दिया गया। 
  • पतंजलि आधुनिक योग के जनक हैं।
  • पतंजलि का 195 सूत्र का संग्रह दैनिक जीवन में पहला व्यावहारिक ग्रंथ प्रदान करता है।
  • पतंजलि के अनुसार केवल कठिन परिश्रम और गहन ध्यान मानव पीड़ा को दूर कर सकता  है और मुक्ति की ओर ले जा सकता है। 

 

तंत्र योग का इतिहास History of Tantra Yoga in Hindi

  • तंत्र चौथी शताब्दी के बाद के काल में प्रारंभिक रूप से उभरा जो योग दर्शन से बिल्कूल अलग एक कट्टरपंथी प्रस्थान का प्रतिनिधित्व करता है।
  • तंत्र ने वेदों तथा सांख्यान दोनों की अवधारणा को खारिज कर दिया।
  • तंत्र पूरी तरह से भक्ति पर ध्यान केंद्रित करता है, विशेष रूप से देवी की पूजा।

 

हठ योग। Hathyoga in Hindi

 

  • हठ योग के सिद्धांत तंत्र से उत्पन्न हुए और इसमें बौद्ध धर्म, अल्केमी और शैव धर्म के तत्व शामिल थे।
  • हठ योग अनुसार विरोधी शक्तियों को एकजुट करने और शरीर और मन को एक साथ लाने के लिए बहुत ताकत, अनुशासन और प्रयास करना पड़ता है।
  • गोरक्षा नामक योगी को हठ योग का जनक माना जाता है।
  • स्वमताराम योगिन, जो खुद को गोरक्षा का शिष्य कहते हैं, ने एक पुस्तक हठ योग प्रदीपिका लिखी, जिसमें सोलह योगों, शुद्धि अनुष्ठानों, आठ प्राणायाम एवं  दस मुद्रा का वर्णन है।
  • हठ योग प्रदीपिका पर आधारित घेरंडा की गेरंडा संहिता सात नियामा प्रस्तुत करती है।  इसमें 32 आसनों और 25 मुद्राओं का भी वर्णन है।
  • लेकिन हठ योग पर सबसे लोकतांत्रिक ग्रंथ शिव संहिता है जो इस बात पर जोर देता है कि एक सामान्य गृहस्थ भी योग का अभ्यास कर सकता है और इसके फायदे उठा सकता है।
  • शिव संहिता 84 आसनों और पांच  प्रकार के प्राणों के बारे में बताया गया है।

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