साइनस के लिए प्रभावी योग

साइनस किया है ? What is Sinus in hindi

साइनसाइटिस, साइनस के सूजन का नाम है। यह बैक्टीरिया, कवक, विषाणु संक्रमण, एलर्जी अथवा आटोइम्यून रोगों के कारण हो सकता है। साइनस गाल की अस्थियों के पीछे, मस्तक के पीछे नासिका संधि के दोनो ओर तथा आंखों के पीछे लघु, वायु पूरित विवर होते हैं। साइनस नासिका के विवर में खुलते हैं और फेफड़ों तक पहुंचने वाली वायु की नमी और तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। साइनस के द्वारा प्राकृतिक तरीके से उत्पादित श्लेष्म, सामान्य तौर पर छोटी नलिकाओं के माध्यम से सुखा दिया जाता है।

इस विचार को ध्यान में रखते हुए कि साइनस की सूजन बिना नासिका की सूजन (राइनाइटिस) के नहीं हो सकती, साइनसाइटिस का नवीन वर्गीकरण इसे रिनो साइनसाइटिस के रूप में संदर्भित करता है। यह सूजन सामान्य साइनस नलिकाओं के मार्ग को बाधित कर देती है (साइनस आस्टिया), जो श्लेष्म के जमाव, हाइपोक्सिया, श्लेष्म निकासी में कमी, नासिका विवर के जमाव में बैक्टीरिया की वृद्धि की ओर ले जाता है। 

साइनस के लिए प्रभावी योग । Yoga Poses for Sinus treatment
Shatkarma

साइनसाइटिस श्रेणियाँ। Sinus types in hindi

साइनसाइटिस को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-

  • एक्यूट (तीव्र) साइनसाइटिस  इसके लक्षण चार सप्ताह से कम रहते हैं।
  • सबएक्यूट (अर्धजीर्ण) साइनसाइटिस चार से आठ सप्ताह तक इसके लक्षण देखे जाते हैं।
  • रिअकरेंट एक्यूट (आवर्तक तीव्र) साइनसाइटिस अक्सर हर वर्ष तीन अथवा उससे अधिक बार जिसमें यह हर बार दो सप्ताह से कम रहता है।

साइनस के कारण । Causes of Sinus in hindi

साइनसाइटिस बढ़ने और उसके बंद होने के विभिन्न कारण हो सकते हैं परंतु सबसे आम कारण विषाणु संक्रमण है। सबसे आम विषाणु संक्रमण सर्दी और फ्लू है। एक्यूट (तीव्र) साइनसाइटिस अधिकतर एलर्जिक राइनाइटिस तथा ऊपरी श्वसन के संक्रमण से जोड़ा जाता है। एक विकृत नासिका झिल्ली अथवा नासिका के अन्य अवरोध नासिका के स्राव को जमा कर सकते हैं, जो दीर्घकालिक साइनसाइटिस का कारण बन सकता है। दांतों का संक्रमण जैसे दांतों का मवाद साइनस में फैलकर उसे प्रत्यक्ष रूप से संक्रमित कर सकता है। वह जोखिम के कारक जिनके कारण साइनसाइटिस संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील बन जाता है उनमें क्षोभक (वायु प्रदूषण, धुंआ और रसायन, जैसे कीटाणुनाशक, निस्संक्रामक तथा घरेलू डिटरजेंट), एलर्जी (एलर्जिक राइनाइटिस, परागकण तथा भूसी) और संकीर्ण नासिका मार्ग (चेहरे की चोट अथवा नाक के भीतर नासिका पुर्वंगक) शामिल हैं।

साइनसाइटिस कई दुर्बल करने वाले लक्षण उत्पन्न कर सकता है जो रोगी को कष्ट देते हैं तथा रोग पैदा करते हैं। यह अति तीव्रता के साथ बढ़ सकते हैं अथवा श्वसन संक्रमणों जैसे कि जुख़ाम के बाद हो सकते हैं। 

साइनसाइटिस के सामान्य लक्षण । Symptoms of Sinus in hindi

दीर्घकालिक साइनसाइटिस के विशिष्ट लक्षण हैं-

  • चेहरे के मध्य, विशेषकर आंखों के बीच अथवा आंखों में दर्द अथवा दबाव।
  • सिरदर्द जो कई सप्ताह तक प्रतिदिन किसी समय होता हो तथा अक्सर प्रातः और सिर हिलाने पर अधिक तीव्र हो जाता हो।
  • नासिका में अवरोध।
  • नासिका स्राव।

अल्पकालिक साइनसाइटिस के विशिष्ट लक्षण हैं-

  • ज्वर।
  • नासिका अवरोध।
  • वाणी में भारीपन।
  • पस के समान नासिका स्त्राव।
  • घ्राण शक्ति (सूंघने की शक्ति) का समाप्त हो जाना।
  • चेहरे अथवा सिर में दर्द जो झुकने पर बढ़ जाता हो।

साइनस के महत्वपूर्ण पहलू

  • मैक्सिलैरी साइनसाइटिस (जो सबसे आम है) कपोल की पीड़ा अथवा दांतों में दर्द के रूप में प्रकट होता है। सिर का दर्द अग्रीय साइनसाइटिस का सूचक है। नाक में दर्द अथवा आंखों के पीछे का दर्द एथमोइड साइनसाइटिस का सूचक है।
  • साइनसाइटिस से पीड़ित अधिकांश लोगों को विभिन्न स्थानों पर मृदुता अथवा पीड़ा होती है और उनके लक्षण सामान्यतः स्पष्ट रूप से यह प्रदर्शित नहीं कर पाते कि किस प्रकार का साइनस संदीप्त हुआ है।
  • कुछ मामलों में, तीव्र साइनसाइटिस मस्तिष्क संक्रमण अथवा अन्य समस्याएँ पैदा कर सकता है।

साइनसाइटिस का यौगिक प्रबंधन। Yoga for Sinus treatment in hindi

साइनसाइटिस के मामले यौगिक तकनीकों के प्रति भली प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं। साइनसाइटिस के उपचार में क्रियाओं और प्राणायाम का चुनाव किया जाता है।

  • कुंजल, सूत्रनेति, जलनेति, कपालभाति जैसी क्रियाएँ नासिका की श्लेष्मल झिल्ली की अतिसंवेदनशीलता को कम करने और साइनस में संग्रहित अतिरिक्त श्लेष्म के निकास में सहायक होती हैं।
  • सूक्ष्म व्यायाम- चयनित अभ्यास
  • योगासन- ताड़ासन, ऊध्र्वहस्तोनासन, मत्स्यासन, सर्वांगासन, भुजंगासन, गोमुखासन, मंडूकासनसिंहासन, शवासन।
  • प्राणायाम- नाड़ीशोधन, उज्जयी, भ्रामरी तथा भ्रस्त्रिका
  • ध्यान

यौगिक आहार के साइनस में रोल । Diet for sinus control in hindi

अस्थमा तथा अन्य श्वसन परिस्थितियों, जिसमें साइनस शामिल है, के प्रबंधन में आहार एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। कुछ आहारों से मरीजों को एलर्जी होने की संभावना होती है जैसे ठण्डे आहार, आइसक्रीम, चाकलेट, अन्य उत्प्रेरक, केले इत्यादि फल, इनके सेवन से बचें। साथ ही, ऐसे आहार जो श्लेष्म के उत्पादन में वृद्धि करते हैं विशेष रूप से वर्जित हैं।

 

साइनस से बचने के उपाय । Preventive tips for sinus in hindi

  • साइनसाइटिस से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि फ्लू और जुखाम को शीघ्रता से दूर किया जाए-
  • अपने हाथों को कई बार धोएँ, विशेषकर दूसरों से हाथ मिलाने के बाद।
  • प्रचुर मात्रा में फल और सब्जियाँ खाएँ जो एण्टी आक्सीडेंट व अन्य रसायनों से भरपूर हों और जो प्रतिरोधक तंत्र को परिवर्धित करें तथा संक्रमण से लड़ने में शरीर की सहायता कर सकें। 
  • तनाव कम करें।
  • सिगरेट के धुएँ और पर्यावरणीय प्रदूषकों के संपर्क में आने से बचें।
  • नाक और साइनस क्षेत्र में आर्द्रता बढ़ाने के लिए आर्द्रताकारक का प्रयोग करे।
  • प्रचुर मात्रा में पेय पदार्थों का सेवन करें जिससे शरीर की नमी में वृद्धि हो।
  • ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण के दौरान सर्दी खांसी की दवा लें।
  • एलर्जी का शीघ्रता और उपयुक्त तरीके से उपचार करें।

अत्यधिक ठंडे और संरक्षित भोज्य पदार्थों से बचें क्योंकि उनमें परिरक्षक होते हैं जो बहुत से व्यक्तियों के लिए एलर्जी कारक होते हैं।

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