शंख प्रक्षालन विधि, लाभ और सावधानियां

शंख प्रक्षालन का अर्थ – Shankhaprakshalana in Hindi

आपके मन में शवाल उठ रहा होगा कि शंख प्रक्षालन किया है? आज आपको हम शंख प्रक्षालन के विधि, लाभ एवं सावधानियां के बारे में बताने जा रहे हैं। शंख प्रक्षालन एक क्लींजिंग योगाभ्यास है जो आपके को टॉक्सिन्स, विषैले पदार्थ एवं अन्य बेकार तत्व से आपके शरीर को बचाता है। इस तरह से इस योग के अभ्यास करने से आप सेहतमंद ही नहीं रहते बल्के बहुत सारी बिमारियों से महफूज़ रहते हैं। शंख प्रक्षालन को वारिसार क्रिया भी कहते हैं। शंख प्रक्षालन दो शब्दों का बना हुआ है-शंख जिसका प्रयोग आंतों के लिए किया गया है क्योंकि आंतें भी शंख के भीतरी भाग के समान जटिल होती हैं ‘प्रक्षालन’ का अर्थ होता है साफ करना या धोना। इस तरह से देखा जाये तो शंखप्रक्षालन की ऐसी शोधन योग क्रिया है जो आंतों को साफ करता है। लेकिन एक बात का ध्यान रहे कि शंख प्रक्षालन हमेशा किसी विशेषज्ञ के निगरानी में ही करनी चाहिए।shankh-prakshalan-steps-benefits-precaution

घेरंडसंहिता में इस शोधन क्रिया को इस तरह से दर्शाया गया है।
आकण्ठं पूरयेद्वारि वक्त्रेण च पिबेच्छनैः।
चालयेदुदरेणैव चोदराद्रेचयेदधः।।
वारिसारं परं गोप्यम्—।। -घे-सं-1/17-18
इसका अर्थ हुआ शंखप्रक्षालन एक ऐसी विशेष योग व्यायाम जिसकी सहायता से जल को आंतों से गुजारा जाता है और आंतों की गंदगी दूर हो जाती है।

शंख प्रक्षालन विधि – Shankhaprakshalana steps in Hindi

शंख प्रक्षालन का ज़्यदा से ज़्यदा फायदा उठाने के लिए आपको इसके स्टेप्स एवं विधि को अच्छी तरह से समझनी चाहिए। यहां पर आपको शंखप्रक्षालन कैसे किया जाये, सरल रूप में बताया जा रहा है।

  • सबसे पहले आप कागासन में बैठें तथा कम से कम तीन गिलास गुनगुना नमकीन पानी लें।
    हठरत्नावली में नमकीन पानी के बजाय गुड़ से मीठे किए गए पानी, नारियल पानी अथवा दूध वाले पानी के प्रयोग का जिक्र मिलता है (1/50), जिसे गर्दन तक लेना चाहिए तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार पानी और वायु को रोकना चाहिए।
    जब आप पानी पी ले तो तुरंत बाद ही नीचे दिए गए आसनों का अभ्यास करें और सही क्रम में करें।
    सर्पासन
    हस्तेत्तानासन
    कटिचक्रासन
    उदराकर्षणासन
  • ऊपर दिए गए आसनों को चार-चार बार दोहराएं यानि आपको चार बार दाएं एवं चार बार बाएं झुकना है।
  • अपने हिसाब से एक बार फिर पानी पिये और ऊपर दिए गए आसनों को फिर से दो बार दोहराएं।
  • जैसे ही मल त्याग ने की इच्छा हो शौचालय से फ्री हुएं।
  • पहले ठोस, उसके बाद अर्द्धठोस मल आएगा और अंत में पीला पानी आएगा।
  • इसके बाद एक गिलास पानी और लें तथा चारों आसन तेजी से दोहराएं। इस बार शौच में केवल तरल पदार्थ आएगा।
  • पानी लेना तथा आसन दोहराना तब तक जारी रखें, जब तक शौच में साफ पानी न आने लगे।
  • अंत में दो या तीन गिलास सादा गुनगुना पानी बिना नमक के लें तथा कुंजल क्रिया करें ताकि शौच से जारी पानी को रोका जा सके।

शंख प्रक्षालन के लाभ – Shankhaprakshalana benefits in Hindi

  1. पाचन तंत्र के शुद्धिकरण एवं विषैले तत्वों से बचाने के लिए यह क्रिया अत्यधिक प्रभावी है।
  2. यह शोधन क्रिया आंतों को सामान्य कार्य करने योग्य बनाती है।
  3. पेट की गैस, कबि्ज़यत, अम्लता, अपच जैसी चीजों से आपको नजात दिलाती है।
  4. माहवारी की पीड़ा, दमा, मुंहासों तथा छालों से मुक्ति दिलाती है।
  5. यह मूत्र संबंधी संक्रमण तथा गुर्दे में पथरी होने से रोकती है।
  6. यदि उपवास या आंशिक उपवास किया जाए तो इस क्रिया के लाभ बढ़ जाते हैं।
  7. फ़ास्ट फूड्स, सुस्त जीवनशैली अथवा अंगों के ठीक से काम नहीं करने के कारण आंतों की प्राकृतिक सफाई नहीं हो पाती है इस स्थिति में यह आंतों की गड़बड़ी दूर करती है।
  8. आंतों में गंदगी जमने और उसको सही तरीके से साफ करने के लिए यह अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास है।
  9. शंखप्रक्षालन क्रिया से मस्तिष्क की काम करने की ताकत बढ़ जाती है और आदमी में तरो ताजगी आ जाती है।

शंख प्रक्षालन की सावधानियां – Shankhaprakshalana precautions in Hindi

शंख प्रक्षालन की सावधानियों को जानना बहुत ही जरूरी है और हमेशा ध्यान रहे इस योग क्रिया को किसी योग विशेषज्ञ के सामंने करनी चाहिए। विशेषज्ञ के द्वारा बताये गई बातों का पालन करनी चाहिए।

  • यह योग क्रिया के बाद आपको गर्म पानी से नहान चाहिए, ठंडे पानी का उपयोग नहाने में एकदम नहीं करनी चाहिए।
  • शरीर को ठंडी हवा से बचाने के लिए तुरंत नहाने के बाद शरीर पर वस्त्र रखें।
  • शंखप्रक्षालन क्रिया के बाद खाली पेट नहीं रहनी चाहिए।
  • इस योग क्रिया समाप्त होने के बाद 1 घंटे के भीतर भोजन ग्रहण करें।
  • मूंग की दाल की खिचड़ी घी के साथ लेना उपयुक्त होगा।
  • काली मिर्च, सिरका तथा खट्टे पदार्थ लेने से बचें।
  • इस क्रिया के उपरांत 24 घंटे तक दूध और दही न लें।
  • अत्यधिक ठंडे अथवा बादलों वाले दिन शंखप्रक्षालन नहीं करनी चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप, हर्निया, मिर्गी, हृदय रोग तथा बवासीर के रोगियों को यह क्रिया नहीं करनी चाहिए।

लघु शंख प्रक्षालन किया है?

यह शंख प्रक्षालन का छोटा रूप है जिसमें स्टेप्स को कुछ जल्दी ही किया जाता है। इसमें आसनों को दो -दो बार दोहराएं यानि आपको दो बार दाएं एवं दो बार बाएं झुकना है। अपने हिसाब से एक बार फिर पानी पिये और आसनों को फिर से दो बार दोहराएं। जैसे ही मल त्याग ने की इच्छा हो शौचालय से फ्री हुएं। पानी लेना तथा आसन दोहराना तब तक जारी रखें, जब तक शौच में साफ पानी न आने लगे। कुंजल क्रिया करें और शौच को रोकने की कोशिश करें

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15 thoughts on “शंख प्रक्षालन विधि, लाभ और सावधानियां”

  1. I have been suffering from chronic constipation for a long time. I have tried shankhprakshalan and the result was encouraging. I want to know can I do laghu shankhprakshalan daily to regularise my bowel habits. Is there any harm in doing laghu shankhprakshalan daily? Can I use palne water instead of salt water?

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  2. एक लीटर पानीमे 10 ग्राम नमक जरूरी है
    अन्यथा लाभ नहीं मिलता।

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  3. Mirgi, harniya, heart right, bavasir,high blood pressure ke peshant ko kyu nhi krni Chahiye shankh prakchalan Vidhi???????

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    • Hi,
      Shankh prakshalan is comprised of so many yogic processes, where some of them are tough, some needs extra precaution, etc. Therefore, it is advisable to avoid Shankh prakshalan in such cases.

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  4. आपकी आंतों शंख प्रक्षालन करने से नाजुक हो जाती हैं उनके ऊपर की जो लेयर होती है वह वापस से आने में समय लगता है नमक का पानी होने के कारण आते शुष्क हो जाती हैं इसीलिए घी की खिचड़ी बहुत अधिक पतली खानी को कहा जाता है राखी आंतों की घी से मालिश मसाज हो जाए यह एक तरह की ऑयल इन है इसके बाद आपको अपनी बातों को विश्राम देना होता है जितना अधिक आप स्थान देंगे उतना अधिक वह शक्तिशाली बनेगी न्यूनतम 24 घंटे का खिचड़ी खाने के बाद परहेज करना चाहिए

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  5. मुझे इस किर्या में बस बार बार पिसाब ही आता है
    8 लिटर तक पानी पी लेता हूं

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  6. I have chronic constipation since a long time as a reult in year December 2017 I had to suffered 4th degree internal piles and I have to operate it by steepler process.Now there has no bleeding problem but my stomach remains upset .Now I want to do sankh praksalopan cleansing for that problem but stomach situation is not good now what can I do

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    • Instead of doing shankh prakshalan initially, it is recommended to take dietary advice from a dietitian. Start with simple yogic process followed with pranayama.

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  7. जानकारी अत्यन्त उपयोगी है।सफलता होती है।लम्बे समय तक कब्ज से निजात मिलती है।

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