कमर दर्द से छुटकारा पाने के लिए भुजंगासन योग करें

भुजंगासन का अर्थ क्या है – Bhujangasana meaning in Hindi

भुजंगासन का मतलब होता Cobra. इस आसन में शरीर का अग्र हिस्सा नाग के फन के जैसा प्रतीत होता है जिसके के कारण इसको भुजंगासन या Cobra pose के नाम से जाना जाता है। जिस तरह से नाग का शरीर लचीला होता है उसी तरह से इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर भी बहुत हद तक लचीला हो जाता है और साथ ही साथ शरीर को सख्त होने से रोकता है। वैसे तो इस आसन के फायदे बहुत सारे हैं लेकिन कमर दर्द को कम करने के लिए भुजंगासन को कैसे किया जाए जिससे से इस परेशानी से आप हमेशा हमेशा से छुटकारा पा सकते हैं। इसका यहाँ विस्तार से विवरण किया गया है।bhujangasan-for-steps-benefits

भुजंगासन या कोबरा पोज़ से कमर दर्द कम करने के लिए आपको यहाँ पर इसके विभिन्य विधियों के बारे में बताया जा रहा है।

 

कमर दर्द के लिए भुजंगासन – Bhujangasana for back pain in Hindi

वैसे भुजंगासन के बहुत सारे विधियाँ हैं लेकिन कमर दर्द से किस तरह राहत मिलें यहाँ पर इसका जिक्र किया गया है।

  • आप सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।
  • अब अपने हथेली को कंधे के सीध में लाएं।
  • दोनों पैरों के बीच एक फुट की दुरी रखें।
  • अब साँस लेते हुए शरीर के अगले भाग को उठाएं।
  • शरीर को इस तरह से उठाते हैं कि आपकी हथेली एवं कोहनी जमीन पर रहे।
  • 10 सेकंड तक इस आसन को बनाए रखें।
  • इस पोज़ को मेन्टेन करते हुए धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • गहरी सांस छोडते हुए प्रारम्भिक अवस्था में आएं।
  • इस तरह से एक चक्र पूरा हुआ।
  • 3 से 4 बार करें।
  • यह कमर दर्द के लिए भुजंगासन की एक अति उत्तम योगाभ्यास है।
  • इसके नियमित अभ्यास से आप पूरी तरह से कमर दर्द से छुटकारा पा सकते हैं।

 

स्लिप डिस्क के लिए भुजंगासन – Bhujangasana for slip disc in Hindi

स्लिप डिस्क से परेशान व्यक्ति को भुजंगासन इस तरह से करनी चाहिए।

  • पेट के बल लेट जाएं।
  • हथेली को कंधे के सीध में लाएं।
  • दोनों पैरों के बीच एक फुट की दुरी रखें।
  • साँस लेते हुए शरीर के अगले भाग को 30 डिग्री तक उठाएं।
  • शरीर को इस तरह से उठाते हैं कि आपकी हथेली एवं कोहनी भी जमीन से उठ जाए।
  • अपने सहूलियत के हिसाब से आसन को बना कर रखें।
  • सांस का ध्यान रखें।
  • पोज़ को धारण करते हुए धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • लंबा सांस छोडते हुए प्रारम्भिक अवस्था में आएं।
  • इस तरह से एक चक्र पूरा हुआ।
  • दो से तीन चक्र करें।

 

भुजंगासन रीढ़ की हड्डी के लिए – Bhujangasana for spine in Hindi

रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए भुजंगासन नीचे दिए गए तरीके से करनी चाहिए। यह आपके कमर दर्द को कम तो करेगा ही साथ ही साथ गर्दन से लेकर पैर तक सभी प्रकार के दर्द एवं परेशानियों से भी आपको महफूज रखेगा।

  • आप सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।
  • अब अपने हथेली को कंधे के सीध में लाएं।
  • दोनों पैरों के बीच की दुरी को कम करें।
  • अब साँस लेते हुए शरीर के अगले भाग को नाभि तक उठाएं।
  • शरीर को इस तरह से उठाते हैं कि आपकी दोनों कोहनी सीधा रहे और आप गर्दन को पीछे करते हुए ऊपर की ओर देखने की कोशिश करें।
  • इस आसन में आपके दोनों हाथ बहुत हद तक सीधा प्रतीत होना चाहिए।
  • 10 सेकंड तक इस आसन को बनाए रखें।
  • इस पोज़ को मेन्टेन करते हुए धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • गहरी सांस छोडते हुए प्रारम्भिक अवस्था में आएं।
  • इस तरह से एक चक्र पूरा हुआ।
  • 3 से 4 बार करें।
  • यह आपके पुरे रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखता है।
  • इसके अभ्यास से आप गर्दन दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, कमर दर्द, घुटने के दर्द इत्यादि से महफूज रहते हैं।
  • यह आपके रीढ़ की हड्डी के साथ साथ वजन कम करने, डायबिटीज, थाइरोइड ग्रथि को स्वस्थ रखने आदि के लिए भी बहुत लाभदायक है।

भुजंगासन के अचूक फायदे – Bhujangasana surprising benefits in Hindi

  1. भुजंगासन कमर दर्द के लिए रामबाण है।
  2. यह पुरे रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखता है।
  3. भुजंगासन पैंक्रियाज को सक्रिय करता है और मधुमेह से बचाता है।
  4. इस शरीर के वजन कम करने तथा मोटापा से निजात दिलाने में सहायक है
  5. इससे अस्थमा में बहुत राहत मिलती है।
  6. भुजंगासन स्त्री रोगों को रोकने में अहम भूमिका निभाता है।
  7. भुजंगासन थाइरोइड ग्रन्थि को स्वस्थ रखते हुए मेटाबोलिज्म प्रक्रिया को नियमित करता है।
  8. भुजंगासन स्लिप डिस्क के लिए फायदेमंद है।
  9. भुजंगासन के नियमित अभ्यास से कब्ज, अपच, गैस, अम्लीयता में बहुत लाभ मिलता है।
  10. भुजंगासन के प्रैक्टिस से आप तनाव मुक्त जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

 

भुजंगासन की सावधानी –  Bhujangasana precautions in Hindi

जो मरीज हो उनको भुजंगासन करते हुए कुछ सावधानियों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए।

  • अधिक कमर दर्द में इस योगाभ्यास को कतई न करें।
  • गर्ववती महिलाएं इसे बिल्कुल भी न करें।
  • हर्निया एवं अलसर में इसे करने से बचना चाहिए।
  • स्लिप डिस्क में विशेष सावधानी लेनी चाहिए।

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