भ्रामरी प्राणायाम विधि, लाभ और सावधानी

भ्रामरी प्राणायाम क्या है। Bhramri pranayama in Hindi

भ्रामरी शब्द की उत्पत्ति ‘भ्रमर’ से हुई है जिसका अर्थ होता है एक गुनगुनाने वाली काली मधुमक्खी। इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय साधक नासिका से एक गुनगुनाने वाली ध्वनि उत्पन्न करता है, यह ध्वनि काली मधुमक्खी की गूंज से मिलती-जुलती है, इसलिए इसका नाम भ्रामरी पड़ा है। योग की पुस्तक घेरंडसंहिता में भ्रामरी को दोनों हाथों से दोनों कानों को बंद कर श्वास लेने और रोकने के रूप में बताया गया है।Bhramri pranayama in Hindi

अर्धरात्रि गते योगी जन्तूनां शब्दवर्जिते।
कणौं पिघाय हस्ताभ्यां कुर्यात्पूरकुम्भकम्।। – घें. सं. 5/78

इस प्राणायाम के प्रतिदिन अभ्यास से साधक को दाहिने कान में विभिन्न प्रकार की ध्वनि सुनाई देती है, जैसे झींगुर की आवाज, बांसुरी, बिजली, ढोल, भौंरा, घड़ीघंट, तुरही इत्यादि और उसके बाद सबसे अंत में हृदय से उठती हुई अनहत की ध्वनि सुनाई पड़ती है। इस ध्वनि के मिश्रण से एक आंतरिक प्रकाश पुंज उठता है। उस प्रकाश पुंज में मस्तिष्क विलुप्त हो जाता है और योग के उच्चतम शिखर को प्राप्त करता है जिसे परमपद कहा जाता है। ऋषि घेरांद के अनुसार भ्रामरी प्राणायाम दिन में तीन बार किया जाना चाहिए। (घेरंडसंहिता 5/77)

 

भ्रामरी प्राणायाम विधि। Bhramri pranayama steps in Hindi

हठप्रदीपिका के अनुसार भ्रामरी में पुरक के दौरान भ्रंगनाद (नर मधुमक्खी की ध्वनि) और रेचक के दौरान भृंगीनाद (मादा मधुमक्खी की ध्वनि) उत्पन्न होती है जिसको हठ प्रदीपिका में निम्न तरह से बताया गया है।

वेगाद्घोषं पूरकं भृङ्गनादं भृङ्गीनादं रेचकं मंदमंदम्।
योगीन्द्राणामेवमभ्यासयोगाच्चित्ते जाताकाचिदानंदलीला।। – ह. प्र. 2/68

  • सबसे पहले आप पद्मासन या सिद्धासन या किसी भी आरामदायक अवस्था में बैठें।
  • आंखें बंद कर लें।
  • मुंह बंद रखें और गहरा श्वास लें।
  • श्वास छोड़ते समय मधुर गुनगुनाने वाली ध्वनि करें।
  • दोनों कानों को अंगूठों से बंद कर लें और मधुमक्खी के गुनगुनाने की ध्वनि के साथ श्वास छोड़े।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 10 से 15 बार करें। और फिर धीरे धीरे इसको 10 से 15 मिनट्स तक करते रहें।

 

भ्रामरी प्राणायाम लाभ। Bhramri pranayama benefits in Hindi

वैसे तो भ्रामरी प्राणायाम के बहुत सारे फायदे हैं। यहां पर इसके कुछ महत्वपूर्ण लाभ के बारे में बताया गया है।

  1. मस्तिष्क को शांत: भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क को प्रसन्न एवं शांत रखता है।
  2. तनाव : यह तनाव एवं घबराहट से राहत दिलाता है।
  3. क्रोध कम करने में : यह क्रोध को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
  4. समाधि का अभ्यास: यह चेतना को अंदर तक ले जाता है और समाधि का अभ्यास देता है।
  5. चिंता को दूर करने में: यह प्राणायाम चिंता को कम करने में बहुत अहम रोल निभाता है।
  6. डिप्रेशन के लिए बेहद जरूरी: अगर आप डिप्रेशन से ग्रसित हैं तो इस प्राणायाम का अभ्यास जरूर करें। यह डिप्रेशन को कम करने में रामबाण का काम करता है।
  7. वासना : वासना की मानसिक और भावनात्मक प्रभाव को कम करता है।
  8. शांत करने में: चूंकि यह प्राणायाम आपके शरीर को शीतलता प्रदान करती है जिसके कारण यह आपको शांत करने में अहम् भूमिका निभाता है।
  9. स्वास्थ्य के लिए: यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसका नियमित अभ्यास से आप बहुत सारे परेशानियों से बच सकते हैं।

 

भ्रामरी प्राणायाम सावधानियां। Bhramri pranayama precautions in Hindi

  • कानों में संक्रमण के दौरान इसे नहीं करना चाहिए।
  • हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति को यह कुंभक के बिना करना चाहिए।

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