योग के 17 प्रकार । 17 Types of Yoga

योग का अर्थ। Meaning of yoga

योग शब्द का मतलब होता है जोड़ना या मिलन। पंतजलि ने योगदर्शन के अनुसार ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’, चित्त की वृत्तियों का रोकना योग है। इसक अर्थ यह हुआ कि चित्तवृत्तियों के निरोध की अवस्था का नाम योग है या इस अवस्था को लाने के उपाय को योग कहते हैं।

योग के 17 प्रकार। 17 Types of Yoga

योग की जानी मानी पुस्तकें जैसे शिवसंहिता तथा गोरक्षशतक में योग के चार प्रकारों में विभाजित किया गया है –

  • मंत्रयोग: मंत्र योग का सम्बन्ध मन से है।
  • हठयोग: जब किसी काम को हठपूर्वक किया जाता है।
  • लययोग: चित्त का अपने स्वरूप विलीन होना।
  • राजयोग: इस योग को सभी योगों का राजा कहा जाता है क्योंकि इसमें प्रत्येक प्रकार के योग की कुछ न कुछ लक्षण जरूर मिल जाती है।

गीता में योग के दो प्रकार है। Dhyan yoga

  • ज्ञानयोग
  • कर्मयोग

हम यहाँ पर योग को आम आदमी भाषा में समझने के लिए इसे 17 भागों  बाटा  सकता है।

  1. राज योग या ध्यान योग: पतंजलि योग दर्शन में सबसे ज़्यदा महत्व राज योग अर्थात ध्यान योग को दिया गया है | और इसके अंतर्गत शेष योगों को रखा गया है|
  2. ज्ञान योग या सांख्य योग: इसके अंतर्गत ज्ञान का भण्डार को परोसा गया है।
  3. कर्मयोग
  4. भक्ति योग: इसमें श्रद्धा, भक्ति, जप और मंत्र को सम्मिलित है।
  5. हठ योग: हठ योग सबसे महत्वपूर्ण योगों में से एक है जिसका सम्बन्ध शरीर और प्राण से है। हठ योग आठ अंगों का बना है जिसमें यम , नियम, आसान, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि है। यह आठ अंग हैं:
  • यम: अहिंसा, झूठ नहीं बोलना, गैर लोभ, गैर विषयासक्ति और गैर स्वामिगत।
  • नियम: पवित्रता, संतुष्टि, तपस्या, अध्ययन और भगवान को आत्मसमर्पण.
  • आसन: बैठने वाले आसन
  • प्राणायाम: सांस को नियंत्रित करना
  • प्रत्यहार: बाहरी वस्तुओं से भावना अंगों के प्रत्याहार.
  • धारणा: एक ही बिंदु पर ध्यान लगाना.
  • ध्यान: प्रकृति गहन चिंतन.
  • समाधि: अपने आप को विलय करना। इसमें संसार में वापस आने का कोई फिर मार्ग या व्यवस्था नहीं होती। यह योग की चरम अवस्था है।
  1. लययोग
  2. कुण्डलिनी योग
  3. मनोयोग: इसके अंतर्गत दृष्टि बंध, अंतरावेश, सम्मोहन और वशीकरण आता है।
  4. अष्टांग योग: यह शरीर में रक्त संचार बढ़ाना, मस्तिष्क को शांत रखना, शरीर की क्षमता बढ़ाना, मांसपेशियों को मजबूत बनाना, वजन घटाना इत्यादि में मदद करता है।
  5. आयंगर योग: इस परम्परा के जनक बीकेएस आयंगर है। यह बहुत हद तक हठ योग की तरह है। इसमें आसन और प्राणायाम की सटीकता पर ध्यान दिया जाता है। इसमें शक्ति, स्थिरता और गतिशीलता पर जोड़ दिया जाता है।
  6. कुंडलिनी योग: इस योग से कुंडलिनी ऊर्जा को जागृत किया जाता है।
  7. पावर योग: इसमें अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  8. आनंद योग: यह योग तंत्र जागरूकता के लिए है जहाँ पर ऊर्जा कंट्रोल पर ज़ोर दिया जाता है।
  9. सम्पूर्ण योग: यह कई प्रकार के योग से मिलकर बना है जैसे आसन, प्राणायाम, मेडिटेशन और जप।
  10. सिवानन्द योग: यह जीवनशैली को तालमेल में रखता है। इसमें आसान, प्राणायाम और ध्यान को बहुत महत्त्व दिया गया है।
  11. भक्ति योग: इसमें दिव्य शक्ति, प्यार, मेडिटेशन और जप पर ध्यान दिया जाता है।
  12. बिक्रम योग: यह 40 डिग्री सेल्सियस तापमान पर किया जाने वाला योग है।

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