योग क्या है, योग के फायदे , नियम , सावधानी और प्रकार

योग क्या है ? What is Yoga in Hindi?

‘योग’ का मतलब होता है ‘जुड़ना’। योग’ शब्द का उत्पति संस्कृत शब्द ‘युज्’ से हुआ है, जिसका अर्थ होता है जोड़ना, बांधना अथवा मिलाना।
अगर योग को पाणिनी के व्याकरण के अनुसार देखा जाये तो ‘योग’ शब्द का तीन अर्थ निकलता हैं – मिलन (युजिर्योगे), समाधि (युज समाधौ) एवं संयम (युज संयमने)।

 

योग के फायदे। Benefits of Yoga

type of yoga

योग के अनगिनत लाभ है। यहां पर इसके कुछ महत्वपूर्ण फायदे के बारे में बताया जा रहा है।

योग विभिन्य प्रकार के रोग/विकार के लिए लाभकारी है।

  1. अम्लता: अगर आपको एसिडिटी को कम करना हो तो पवनमुक्ताकसन, सुप्त वज्रासन, उष्ट्रा सन, हलासन, वज्रासन, प्राणायाम आदि का अभ्यास करना चाहिए।
  2. क्रोध: आजकल प्राय लोग क्रोध से ग्रसित देखा जा सकता है। पद्मासन, मकरासन, शलभासन, उष्ट्रासन, प्राणायाम, आदि इसके लिए लाभदायक है।
  3. दमा: दमा के लिए ताड़ासन, गोमुखासन, सुप्तरवज्रासन, उष्ट्रा्सन, उत्ताानासन, भुजंगासन, मकरासन, प्राणायाम, इत्यादि फायदेमंद है।
  4. पीठ दर्द: पीठ दर्द में आपको पवनमुक्तासन, भुजंगासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, मर्कटासन का अभ्यास करना चाहिए।
  5. खांसी/जुकाम: इसके लिए सूर्यनमस्काार, भुजंगासन, ताड़ासन, सिंहासन, प्राणायाम बहुत मुफ़ीद है।
  6. मधुमेह: डायबिटीज को रोकने के लिए पश्चिमोत्ताआनासन, अर्द्धमत्येंद्रासन, वक्रासन, मंडूकासन, भुजंगासन, हलासन, सर्वांगासन,
  7. मयूरासन, गोमुखासन,कपालभाति कपालभाति आदि योगाभ्यास करना चाहिए।
  8. साइनसाइटिस: साइनसाइटिस से नजात पाने के लिए षट्कर्म करनी चाहिए।
  9. स्लिप्डस डिस्का: अगर आपको इस तरह की परेशानी है तो भुजंगासन किसी एक्सपर्ट्स के सामने करनी चाहिए।
  10. कफ: कफ में जालंधर बंध सहायक है।
  11. रक्त प्रवाह: रक्त प्रवाह को ठीक करने के लिए उड्डीयान बंध का अभ्यास करना चाहिए।
  12. तंत्रिका तंत्र: तंत्रिका तंत्र स्वस्थ रखने के लिए मूलबंध सहायक है।
  13. बलगम: सूर्यबेधना से पित्त बढ़ता है और बलगम कम होता है।
  14. थयरॉइड: थयरॉइड को कम करने के लिए उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।
  15. वजन: वजन कम करने के लिए भाष्त्रिका का अभ्यास करें।
  16. तनाव: तनाव मुक्त जीवन पाने के लिए भ्रामरी रामबाण का काम करता है।
  17. कपालभाति: इसका नियमित अभ्यास करने से आप बहुत सारी बीमारियों से नजात पा सकते हैं।
  18. पेट की समस्यां: पेट की समस्यां से निदान पाने के लिए नौलि एवं कुंजल का अभ्यास करें।
  19. सर्दी एवं जुकाम: इससे नजात पाने के लिए जलनेति एवं सूत्रनेति बहुत लाभदायक है।

 

योग के नियम। Yoga rules

  • योग करने से पहले, योग करते समय एवं इसके बाद कुछ नियमों का पालन करने से योग के फायदे और भी नजर आने लगते हैं।
  • शौच करके आसन करें।
  • योग खाली पेट किए जाने चाहिए।
  • योग हवादार स्थान पर करने चाहिए।
  • ढीले, हल्के एवं आरामदेह कपड़े पहन कर योग करनी चाहिए।
  • अगर कोई समस्या हो तो एक्सपर्ट के हिसाब से ही योग करनी चाहिए।
  • योग के तुरंत बाद भोजन नहीं करना चाहिए।

 

योग के सावधानियां ।Yoga precautions

  • योग करते समय कुछ सावधानी लेना जरूरी है।
  • बहुत गंभीर गठिया, नसों में सूजन और हड्डियों तथा जोड़ों में चोट होने पर पार्श्वतकोणासन नहीं करना चाहिए।
  • गंभीर गठिया रोग होने पर उत्कटासन नहीं करनी चाहिए।
  • घुटनों में दर्द होने से पद्मासन न करें।
  • बवासीर के रोगियों को वज्रासन नहीं करना चाहिए।
  • घुटनों अथवा कूल्हेक की गठिया संबंधी समस्यााओं से ग्रस्त भद्रासन नहीं करनी चाहिए।
  • बवासीर में गोमुखासन नहीं करना चाहिए।
  • रीढ़ में अकड़न होने पर और गर्भवती स्त्रियों को अर्द्धमत्येंद्रासन नहीं करना चाहिए।
  • पेट में अल्सर की समस्या‍ होने पर पश्चिमोत्ताानासन करने से बचे।
  • उच्च‍ रक्तपचाप, हृदय रोग, हर्निया में उष्ट्रासन ने करें।
  • पीठ दर्द में शशांकासन करने से बचें।
  • हर्निया के रोगी एवं पेट में जख्म वाले व्यक्ति भुजंगासन कदापि न करें।
  • हर्निया, पेप्टिक अल्सर, कोलाइटिस, उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को धनुरासन नहीं करनी चाहिए।
  • हृदय की गंभीर समस्याओं, उच्च रक्तचाप, चक्कर आने, पेट में सूजन, इत्यादि में चक्रासन न करें

 

योग के प्रकार । Yoga types

  • मंत्रयोग
  • हठयोग
  • लययोग
  • राजयोग
  • ज्ञानयोग
  • कर्मयोग

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