विपरीतकरणी मुद्रा योग विधि, लाभ और सावधानी

विपरीतकरणी मुद्रा क्या है ? Viparitakarani in Hindi

 

विपरीतकरणी एक संस्कृत शब्द है जिसमें विपरीत का अर्थ होता है उलटा। इस आसन में पैर ऊपर होता है और बहुत तक सिर नीचे। विपरीतकरणी मुद्रा एक ऐसा योगाभ्यास है जो शरीर के सातों चक्र को सक्रिय करने में अत्यंत मददगार है और कुण्डलिनी जागरण में सहायक है। इस योगाभ्यास में शरीर अर्ध कंधे पर खड़ा जैसा लगता है। विपरीतकरणी मुद्रा को अंग्रेजी में Upside-down yoga भी कहते हैं।Viparitakarani Steps, Benefits and Precautions

 

विपरीतकरणी मुद्रा विधि। How to do Viparitakarani

यहां पर विपरीतकरणी मुद्रा योग के सरल विधि के बारे में बताया जा रहा है। नीचे दिए गए तरीके को जानकर आप इसे अपने से अभ्यास कर सकते हैं।

तरीका

  • सबसे पहले आप पीठ के बल आराम से लेट जाएं और पैरों को एक साथ रखें।
  • सांस लेते हुए पैरों को सीधे रखते हुए धीरे धीरे ऊपर उठाएं।
  • हाथों को नितंब (Buttocks ) के नीचे लाकर नितंब को उठाएं।
  • कोहनियां (Elbows) को जमीन पर रखते हुए हाथों से कमर को सहारा दें।
  • धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • इस स्थिति को कुछ समय के लिए मेन्टेन करें।
  • फिर लम्बा सांस छोड़ते हुए पैरों को धीरे धीरे नीचे लाएं।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह आप 3 से 5 चक्र करें।

 

विपरीतकरणी मुद्रा लाभ। Viparitakarani benefits

  1. कुंडलिनी जागरण में : इस योग का अभ्यास करने से शरीर में मौजूद सभी सातों चक्र सक्रिय होने लगता है और कुंडलिनी जागरण में सहायक है। इस तरह से आपको बहुत सारी परेशानियों से दूर करने में मददगार है।
  2. बाल झड़ना रोकता है: इसके अभ्यास से सिर में खून एवं खनिज तत्व का प्रभाव अच्छी तरह होने लगता है जो आपके बाल के सेहत के लिए बहुत ही अच्छा है।
  3. चेहरे के लिए: इसके नियमित अभ्यास से चेहरा खिल उठता है।
  4. पाचन सुधार: यह पाचन तंत्र को ठीक करता है और भोजन के पचाने में अहम भूमिका निभाता है।
  5. कब्ज दूर करने में: इसके नियमित अभ्यास से आप कब्ज से निजात पा सकते हैं।
  6. मेमोरी बढ़ाने में: इसके अभ्यास से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बढ़ता है और मस्तिष्क सतर्क होता है।
  7. थायरॉयड: यह थायरॉयड के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण योगाभ्यास है। यह थायरॉयड के कार्य को संतुलित करता है तथा थायरॉयड की अतिसक्रियता से होने वाली समस्याएं दूर करने में सहायक है।
  8. शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में: यह शरीर में ऊर्जा की बढ़ोतरी करने में सहायक है।
  9. आँखों की रौशनी के लिए: आँखों की दृष्टि को बढ़ाने में सहायक है।
  10. नींद : इसके अभ्यास से निद्रा अच्छी आती है।
  11. वीर्य: इसके नियमित से वीर्य सम्बन्धी तमाम रोग नाश हो जाते है ।
  12. मधुर आवाज: मधुर कंठ को स्वर मधुर बनाने में सहायक है।

 

विपरीतकरणी मुद्रा सावधानी। Viparitakarani precaution

  • उच्च रक्तचाप में इसका अभ्यास न करें।
  • हृदय रोग से पीड़ित लोग इस योग को करने से बचें।
  • बढ़े हुए थायरॉयड से ग्रस्त व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • यह आसन उनको भी नहीं करनी चाहिए जिनको गर्दन में दर्द हो।
  • प्रेग्नन्सी में इसे बिल्कुल न करें।
  • कंधे के दर्द में इस से बचें।

 

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