सूत्रनेति योग विधि, लाभ और सावधानी

सूत्रनेति क्या है ? Sutraneti in Hindi

‘नेति’ हठयोग की क्रिया है जो श्वास मार्ग की सफाई से संबंधित है। इसमें गले की सफाई होती है। प्राणायाम का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए पहले नेति क्रिया करनी चाहिए ताकि श्वास नली सही तरीके से साफ हो जाए। सूत्रनेति में बारीक धागा नाक के एक छेद में डाला जाता है और उसे गले के रास्ते मुंह से होते हुए बाहर खींच लिया जाता है।

 

सूत्रनेति की विधि। Sutraneti steps

सूत्रनेति का मतलब होता है धागे से नाक की सफाई। इसको योगग्रंथ हठप्रदीपिका में निम्न सूत्र के मदद से दर्शाया गया है।

सूत्रं वितस्तिसुस्निग्धं नासानाले प्रवेशयेत्।
मुखान्निर्गमयेच्चैषा नेतिः सिद्धैर्निगद्यते।। – ह.प्र. 2/29

अर्थाथ हाथ भर लंबाई वाला मुलायम धागा नाक के रास्ते डालें ताकि वह मुंह से बाहर आए। सिद्ध इसे नेति कहते हैं।

कैसे करें

सूत्रनेति के करने के सरल विधि को नीचे बहुत ही आसान भाषा में समझाया गया है।

  • सबसे पहले आप सावधानी से मोड़ा गया और मोम में डुबोया गया सूती धागा लें।
  • रबर की पतली नलिका भी सूत्र के रूप में प्रयोग की जा सकती है।
  • खगासन में बैठें।
  • सिर पीछे की ओर झुकाएं एवं सूत्र को नाक के उस छेद में डालें जो उस समय अधिक सक्रिय हो।
  • धीरे-धीरे सूत्र को इसे नथुने में धकेलें।
  • जब धागा गले के रास्ते नीचे आ जाए तो तर्जनी एवं मध्यमा अंगुलियों को मुंह में डालें और सूत्र का सिरा पकड़ें एवं उसे सावधानी से धीरे-धीरे मुंह से बाहर निकाल लें।
  • कुछ इंच धागे को नाक से बाहर लटकता रहने दें।
  • अब आप धागे को धीरे-धीरे कई बार आगे पीछे खींचें।
  • धागे को धीरे-धीरे बाहर निकालें तथा यही क्रिया दूसरे नथुने से भी दोहराएं।

 

सूत्रनेति की सावधानी। Sutraneti precautions

  • सूत्रनेति को प्राणायाम से पहले किया जाना चाहिए क्योंकि इससे श्वास मार्ग साफ हो और नथुनों से वायु के अबाध आवागमन हो सके।
  • सूत्र स्वच्छ एवं साफ होना चाहिए तथा उसे बहुत धीरे एवं आराम से डाला एवं निकाला जाना चाहिए।
  • नासिका मार्ग को पूरी तरह साफ करने के लिए इसके उपरांत जलनेति की जानी चाहिए।
  • सप्ताह में एक बार इसे और इसके उपरांत जलनेति कर सकते हैं।
  • यदि मार्ग बंद है तो जलनेति को इससे पहले भी और बाद में भी किया जा सकता है।
  • नाक से खून आने की समस्या वाले व्यक्तियों को यह क्रिया नहीं करनी चाहिए या करने से पूर्व विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

 

सूत्रनेति के लाभ । Sutraneti benefits

सूत्रनेति के फायदे को हठप्रदीपिका में बहुत सटीक तरह से समझाया गया है।

कपालशोधनी चैव दिव्यदृष्टिप्रदायिनी।
जत्रूर्ध्वजातरोगौधं नेतिराशु निहन्ति च।। – ह.प्र. 2/30
नेति क्रिया मस्तिष्क की कोशिकाओं को साफ करती है, दिव्य दृष्टि प्रदान करती है तथा शरीर के ऊपरी भाग से सभी रोगों का नाश करती है।

इसके इलावे इसके कुछ महत्वपूर्ण फायदे को नीचे बताया गया है।

  1. बलगम दूर करना: नेति क्रिया से नासिका मार्ग में जमा हुआ हानिकारक बलगम दूर होता है तथा श्लेष्मा झिल्ली स्वस्थ होती है।
  2. श्वसन अवरोध दूर करना: नेति की क्रिया से श्वसन प्रणाली के अवरोध दूर होते हैं और वह ठीक से कार्य करती है।
  3. आँख के लिए: यह आँख के लिए बहुत फायदेमंद है और अश्रु ग्रंथियों के कार्य में सुधार करती है।
  4. सिर तंत्रिकाओं के लिए: सूत्रनेति तंत्रिकाओं को सक्रिय करती है तथा इसके कार्य में स्फूर्ति लेकर आता है।
  5. मस्तिष्क: मस्तिष्क के घ्राण क्षेत्र के कार्य में सुधार करती है।
  6. साइनस: इससे झिल्लियों एवं साइनस ग्रंथियों की मालिश होती है और साइनस को कम करने में मदद मिलती है।
  7. विषाणुओं: यह विषाणुओं के आक्रमण का प्रतिरोध बढ़ाती है।
  8. सूखे बलगम : सूत्रनेति जमा हुए सूखे बलगम एवं बाहरी कणों को दूर करती है तथा खून का रुकने में मदद करती है।
  9. आज्ञाचक्र को सक्रिय: सूक्ष्म स्तर पर नेति की क्रिया कोशाओं के साथ मिलकर मस्तिष्क के मध्य में मनोसंवेदी केंद्र आज्ञाचक्र को सक्रिय करती है।

 

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